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पत्नी की समझदारी और शादी के रिश्ते का बचाव

नमस्कार दोस्तों !

ये मेरे ब्लॉग पर पहला पोस्ट है और मैं आशा करता हूँ कि आपको मेरे लेख पसंद आएंगे और ऐसे ही मोटीवेट होकर मैं लेख लिखता रहूँगा. जैसा कि आपको लोग जानते हैं कि शादी, भारत  में एक बहुत ही पवित्र बंधन हैं, जिसमें एक पुरुष और औरत मिलकर साथ रहने का वादा करते हैं और शादी के बाद बहुत ही खुशनुमा जिंदगी व्यतीत करते हैं. लेकिन इस अच्छी भली शादी में कहीं न कहीं या कभी न कभी परेशानियाँ आ जाती हैं, जिससे कि दोनों जीवन साथी साथ रहने में हिचकते हैं और रिश्ता तोड़ने की बात करते हैं.  

मेरा जहाँ तक अनुभव है इसमें पहली पहल एक पत्नी करती है क्योंकि वो जल्दी ही दूसरों के बहकावे में आजाती है खासकर अपनी माँ के बहकावे में, जो उसकी जिंदगी तबाह कर देती है.

तो आज ये पोस्ट उन अबला औरतों के नाम जो मायके में बेवजह पड़ीं हैं और अपने मायके के साथ मिलकर अपने पति पर झूठे केस करने को बहुत ज्यादा ही आमादा हैं।

मैं उन्हें सुझाव देना चाहूंगा कि जब भी तुम्हारा बाप, भाई, जीजा, मामा, नाना या कोई भी ऐसा इंसान जो तुम्हारे पति से रिश्ता तुड़वाने के लिए घर में बात करे चाहे कारण कोई भी हो और रिश्ता तोड़ने के लिए घर पर कोई वकील लायें, तो उस प्रोफेशनल वकील के हवा हवाई प्रोपगेंडा में ना आकर, उनसे अपने दिमाग की थोडी सी बत्ती जलाकर कुछ समझदारी वाले प्रश्न पूछिए।

जैसे कि पूछिए-

  • दहेज की धारा 498a का केस खत्म होने का औसत टाइम क्या है?

इससे आपको ये पता पडेगा कि भारत में केस कितने लम्बे चलते हैं और पारिवारिक मुद्दों को कभी कोर्ट में नहीं ले जाना चाहिए. इसमें बस समय और पैसों की बर्बादी होती है और ये केस कभी जल्दी ख़त्म नहीं होते हैं.

  •  अब तक इंडिया में सबसे लंबा दहेज किसका चला है और कितना लंबा चला है?

इससे आपको ये पता पड़ेगा कि सबसे लम्बा 498a का केस कितना लम्बा चला है और जिसका चला है उसको कितनी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है.

  • सबसे कम वक़्त में खत्म होने वाला दहेज का केस किसका था और कितना टाइम में खत्म हुआ था?

शायद इससे आपको पता पड़ेगा कि इंडिया में जल्दी केस कभी ख़त्म ही नहीं होते हैं और पति- पत्नी के केस केवल अपनी ईगो सैटीसफाई के लिए किये जाते हैं.

  • सेटलमेंट होने की दर कितनी प्रतिशत है?

 यहाँ आप जानोगे कि आजकल के पुरुष, अपनी पत्नियों द्वारा झूठे केस करने से नहीं डरते हैं.

  • कितने प्रतिशत बेकसूर मर्दों को 498a के केस में जज द्वारा जेल हुई है?

अब तो भारतीय जज भी समझ गए हैं कि भारत में शादीशुदा औरतें आज़ादी के नाम पर, अपने झूठे घमंड में अपनी माँ या अपने मायके के घमंड में आकर अपने ही पति पर झूठे केस का डर बिठा रहीं हैं, जिससे कानूनी तंत्र त्रस्त आकर इसको कानूनी आतंकवाद कि संज्ञा भी दे चुका है, तो सजा होना तो नामुनकिन है तो फिर केस क्यों किया जाए!

  • दहेज केस से आजकल के पुरुष क्या डर जाते हैं?

केस करने के बाद आपको पता पड़ेगा कि कोई पुरुष नहीं डरता है अगर कोई औरत इक्कीसवीं में एडवांस्ड हो गयी है तो स्वाभाविक रूप से पुरुष भी मजबूत बने होंगे.

  • क्या सच में अपने पति पर, जो मुझ पर बहुत विश्वास करता है, उसपर केस करने से मेरी जिन्दगी आबाद हो जाएगी?

देखिये सिंपल सी बात है अगर कोई पति आप का ध्यान रखता है आपके लिए आंसू बहाता है तो इसका मतलब अगर आपने उसपर झूठा केस कर दिया तो आपको आपकी अंतरात्मा कभी माफ़ नहीं करेगी और उसका फल आपको भविष्य में जरूर मिलेगा.

  • अपने व्यावहारिक ज्ञान से बताइए कितने प्रतिशत पति ऐसा करने से सॉरी मांग लेते हैं? और इमानदारी से बताइए कि क्या ये सही डिसीजन है?

इंसानियत के नाते गलत डिसिजन गलत ही होता है अगर आप पति को अपने मायके वालों के सामने कुछ नहीं समझती हैं और हमेशा उनके ही गुणगान करती रहती हैं. और जब केस झूठा होगा तो माफ़ करियेगा सॉरी आपसे पति तो क्या कोई ससुराल पक्ष का बंदा भी नहीं मांगेगा. आपकी लाइफ जहन्नुम हो जाएगी जिसका पता आपको कुछ सालों बात स्वभाविक लग जायेगा.

और आखिरी बात फिर भी आपको लगता है कि कुछ पैसा आप बना लोगी झूठा केस लगाकर, तो अपनी गारंटी के लिए एक स्टांप पेपर पर अपने ही वकील से लिखकर लेलो कि अगर तुम्हारे पति ने तुम्हारे मन मुताबिक मांगी हुई रकम नहीं दी तो उतनी ही रकम देने की जिम्मेदारी वकील की हो।

तो हमारे देश कि मोहतरमाओं आपसे अनुरोध है कि अपने दिमाग की बत्ती जलाकर, समझदारी से ये सब पूछो, शायद सही में अक्ल आज जाए आपको।

हो जाए ज्ञान आपको, जल जाये दिमाग की बत्ती और कुछ व्यावहारिक ज्ञान हो जाए आपको और आपके नासमझ परिवार वालों को।

इन सब का उत्तर मांगो वो भी सबूत के साथ और वकील ना दे तो समझ लो वो तुम्हारा काटने आया है।

बल्कि मैं तो ये कहूंगा आप जैसे नासमझ परिवारों को और मूर्ख बनाने का सिस्टम में एक स्कैम चल रहा है, जिससे सबका धंधा पानी बंधा हुआ है। जिस लीगल प्रोफेशनल को तुम घर बुलाकर सीख ले रही हो, वो तुम्हारे पैसों से, आने वाले पांच या दस साल के लिए अपनी रोजगार सेट करने आया है।

एक मुर्गी फंसाने आया है।

एक सही वकील पहले व्यावहारिक ज्ञान देगा और कहेगा अपने माता पिता को साइड में रख, भाइयों, बहनों, व जीजा को साइड में रख और रिश्ता बचा ले अपना. ये सब भ्रम है कि ये तेरे साथ होंगे, कुछ नहीं होगा अंत में भी टेबल पर सेटलमेंट ही होनी है।

पुरुष तो मजबूरी में कोर्ट जाने की ड्यूटी कर रहे हैं परन्तु आप महानुभाव लोग तो अपनी ही मूर्खतापूर्ण हरकतों से, अपनी ही नासमझी में खुद ही फंसकर अपना पैसा भी बर्बाद कर रहे हो, समय भी बर्बाद कर रहे हो और सबसे बड़ी बात अपनी लाडली की जिंदगी भी जहन्नुम कर रहे हो और साथ में सामने वाली पार्टी का भी लपेट रहे हो, वो भी बिना बात के।

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